राजस्थान अपने शाही महलों और किलो के माध्यम से पर्यटकों के मन में बस चूका है। यहाँ पर एक से बढ़कर एक किले और महल मौजूद है जो उस दौर की गाथा सुनाते है।
इन महलो और किलों को इतनी खूबसूरती और सूझबूझ से बनाया गया था की आज भी ये उसी प्रकार से मजबूती के साथ खड़ी है जिस प्रकार से उस ज़माने के राजाओं ने निर्माण किया था।
यह वह दौर था जब राजे-महराजे अपनी प्रजा को सबकुछ मानते थे उनकी सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किया करते थे।
अपनी एवं प्रजा की सुरक्षा के लिए पहाड़ों या ऊँचे स्थानों पर किले या महल का निर्माण किया करते थे ताकि दुश्मन को दूर से ही देखकर आगे की रणनीति बनाकर उन्हें हराया जा सके।
तो दोस्तों आज हम चलने वाले है राजस्थान के एक और नगीने यानी मेहरानगढ़ किला के दर्शन करने, उम्मीद है आप सभी को यह यात्रा बेहद पसंद आएगा।
1. मेहरानगढ़ किला कहाँ पर स्थित है ? [Mehrangadh fort in hindi]
मेहरानगढ़ किला राजस्थान के जोधपुर में स्थित है। शुरुआत में इस किले का नाम था मिहिरगढ़, मिहिर का शाब्दिक अर्थ होता है सूर्य और गढ़ का अर्थ होता है किला या दुर्ग।
इसीलिए इस किले को सूर्य का किला भी कहा जाता है।
यह किला काफी विशाल है और इस प्रकार का किला, उस समय बनाना लगभग असम्भब था।
लेकिन इस सुदृण किले का निर्माण न सिर्फ करवाया बल्कि उससे अपने प्रजा को भी बाहरी अक्रान्ताओ या आक्रमणकारियों से भी बचाये रखा।
इस किले में प्रवेश के लिए 8 द्वारा है और अनगिनत बुर्जे है। इन बुर्जों से ही सेना दुश्मनो पर गोले दागती थी।
कुल मिलकर यह किला लगभग 9 से 10 किमी लम्बी और ऊँची दीवारों से लैस है और अभेद्य भी।
इस किले की बनावट इस प्रकार से की गयी थी की दुश्मन देश की सेना किसी भी सूरत में प्रवेश ना कर पाए।
इस किले के अंदर ही संग्रहालय स्थापित किया गया है और कई दुकाने भी सजाकर रखी गयी है।
आने जाने वाले पर्यटकों के लिए जगह-जगह पर संगीतकार, राजस्थानी गीत गाते रहते है जिसे राजस्थानी परिवेश और परंपरा के बारे में लोगों को जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ पर्यटकों का मनोरजन होता रहे।
2. मेहरानगढ़ किले का इतिहास [ Mehrangarh fort history]
मेहरानगढ किला का निर्माण जोधपुर के राजा राव जोधा ने करवाया था, उनके पिता का नाम था राजा रणमल था। राव जोधा अपने पिता की 24 वि संतान थे।
राजा राव जोधा जब जोधपुर के राजा बने तब उनके सामने अपने साम्राज्य को बढ़ने के साथ साथ उसे सुदृण बनाये रखने के लिए एक नए किले की आवश्यकता जान पड़ी।
इसके लिए उन्होंने एक पहाड़ी जिसे भोर चिड़ियाटुंक के नाम से भी जाना जाता था।
इस किले के निर्माण के लिए राजा राव जोधा जी ने 12 मई 1459 को इसी पहाड़ी पर इसकी नीव रखी। इसे किले को पूरी तरह विकसित करने का श्रेय महाराज जसवंत सिंह को जाता है।
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2.1 राव जोधा कौन थे ? [Who was Raav jodha ]
राठौर वंश के प्रतापी शासकों में से एक थे राव जोधा। इनके पिता का नाम राव रणमल था। आप इनकी वीरता का अनुमान इस प्रकार से लगा सकते है की जब राव जोधा जी राजगद्दी पर बैठ तो उसके कुछ समय पश्चात यानी वर्ष 1453 में मण्डौर पर आक्रमण करके उसे जीत लिया।
यह उनकी विजय की पहली शुरुआत थी। इसके बाद उन्होंने मेड़ता, फलोदी, पोखरण, भादरजन, सोजात, जायतारन, सिवा, सिवान,गोडवाड़ जैसी इलाकों को अपने अधीन कर लिया था।
वर्ष 1459 में इन्होने जोधपुर नामक एक नया नगर की स्थापना की और इसके साथ ही चिडियाटूक नामक पहाड़ी पर सुरक्षा करने को ध्यान में रखते हुए मेहरानगढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया था।
राव जोधा जी के पश्चात राजगद्दी पर उनके उत्तराधिकारी राव सातल, राव सुजा तथा राव गंगा मारवाड़ के शासक बने।
3. मेहरानगढ़ किले की स्थापत्य कला [ Mehrangarh fort architecture]
यह किला लाल बलुआ पत्थर से निर्मित किया गया है और तो और इसे बनाने के लिए महीन कलाकारी की गयी है। मेहरानगढ़ किला एक वास्तुशिल्प चमत्कार है।
यह किला अपनी सीमाओं की रक्षा करने वाले शहर के ताज के रूप में खड़ा है।
एक प्रसिद्ध कहावत है कि मारवाड़ के लोग किले को देखे बिना दिन की शुरुआत भी नहीं कर सकते।
यह किला सबसे अधिक फोटो खिंचवाने वाले किले में से एक है।
इस किले के अंदर कई सुंदर महल स्थापित है जैसे-
- मोती महल
- फूल महल
- शीश महल
- सिलेह खाना
- दौलत खाना , इत्यादि
4. जोधपुर के अन्य पर्यटन स्थल [Tourist place in jodhpur]
दोस्तों यूँ तो पूरा राजस्थान ही एक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।
लेकिन चूँकि आज हम बात कर रहे है जोधपुर जिले की तो यदि आप जोधपुर आये है तो यहाँ के अन्य पर्यटन स्थलों को जरूर जाने।
- उमेद भवन पैलेस
- मेहरानगढ़ किला
- जसवंत थाडा
- राव जोधा डेजर्ट पार्क
- घंटा घर
- मंडोर गार्डन
5. मेहरानगढ़ किले के खुलने का समय और प्रवेश शुल्क [Mehrangarh fort opening time & Ticket price]
मेहरानगढ़ किला पुरे सप्ताह खुला रहता है। हालाँकि खुश विशेष छुट्टियों के समय में ही यह किला बंद रहता है।
5.1 खुलने का समय
दोस्तों मेहरानगढ़ का किला सप्ताह भर खुला रहता है। यह किला सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे से तक खुला रहता है।
वही इस किले में प्रवेश शुल्क की बात करें तो यदि आप भारतीय नागरिक है तो आपको 200 रूपये देने पड़ते है।
यदि आप एक विद्यार्थी है तो आपको 100 रूपये प्रवेश शुल्क देने पड़ते है।
वही आप विदेशी नागरिक है तो आपको 600 रूपये देने पड़ते है।
वही इस किले में आप फोटो और वीडियो ले सकते है इसके लिए कुछ अलग से टिकट लगता है।
5.2 प्रवेश शुल्क
इस किले में प्रवेश के लिए विभिन्न प्रकार के शुल्क लिए जाते है। इन प्रवेश शुल्क की लिस्ट इस प्रकार है-
विदेशी यात्री | 600 |
विदेशी यात्री [ विद्यार्थी ] | 400 ₹ |
भारतीय नागरिक | 100 ₹ |
भारतीय नागरिक [ विद्यार्थी सेना के जवान एवं सीनियर सिटिज़न ] | 50 ₹ |
फोटो | 100 ₹ |
वीडियो | 200 ₹ |
लिफ्ट का प्रयोग | 50 ₹ |
गाइड | 300 – 600 ₹ |
6. परिवहन सुविधा [How to reach meharangarh fort]
नजदीकी रेलवे स्टेशन- | जोधपुर रेलवे स्टेशन |
नजदीकी हवाई अड्डा- | जोधपुर हवाई अड्डा |
सड़क सुविधा- | राजस्थान सरकार द्वारा कई बसें चलायी जाती है इसके आलावा आप निजी साधन का भी प्रयोग कर सकते है। |
7. सवाल जवाब [FAQ]
दोस्तों आप सभी के द्वारा मेहरानगढ़ किला के बारे में कुछ सवाल पूछे गए है। जिनमे से कुछ को हमने इस आर्टिकल में सबमिट किया है।
उम्मीद है हमारे द्वारा दिए गए जवाबों से आप सभी संतुष्ट हो पाएंगे।
अगर फिर भी आपके मन में इस जगह से लेकर कोई भी क्वेरी हो तो कमेंट में जरूर बताएं।
मेहरानगढ के किले का निर्माण जोधपुर के राजा राव जोधा ने करवाया था
मेहरानगढ़ का किला सुबह 9 बजे खुलता है और शाम को शाम 6 बजे बंद होता है
जी हाँ यह किला खुला हुआ है लेल्किन आप अपनी सेहत का ख्याल जरूर रखें. और हाँ सबसे जरुरी बात कोविद प्रोटोकॉल जरूर फॉलो करें ताकि आप भी सुरक्षित रहे और दूसरे भी.
मेहरानगढ़ किले में अंतिम समय राजा गज सिंह राठौर जी ने बिताया था.
मेहरानगढ़ किले का निर्माण वर्ष 1459 में राव जोधा जी ने करवाया था.
भारत में मेहरनगढ़ के महल को एक शापित किला माना जाता है।
8. मेहरानगढ़ किले की तस्वीर [Mehrangarh fort image]
9. निष्कर्ष [Conclusion]
मेहरानगढ़ किला अपने समय का अभेद्य किला था। इसी प्रकार का एक किला नाहरगढ़ का किला था जिसे किसी भी देश के राजा नहीं जीत पाए थे।
यह किला लगभग 9 से 10 किमी लम्बी और ऊँची दीवारों से लैस है और अभेद्य भी है।
इस किले की बनावट इस प्रकार से की गयी थी की दुश्मन देश की सेना किसी भी सूरत में प्रवेश ना कर पाए।
दोस्तों यदि आप एक इतिहास के विद्यार्थी है या फिर अपने देश के बारे में जानना चाहते है , राजाओ के बारे में जानना चाहते है तो मेरा सुझाव है की इन जगहों पर जरूर जाएँ।
ये जगहें न सिर्फ आपका मनोरजन करेंगी बल्कि आप इन जगहों के बारे में जानकर प्राचीन राजाओं उनकी युद्धनीति और राजनीती से संबधित कितनी ही बातो को जान पाएंगे।
9. मेहरानगढ़ फोर्ट की लोकेशन [Meharangarh fort location, map]
10. सबसे महत्वपूर्ण बात [Most important thing]
दोस्तों इन ऐतिहासिक इमारतों या पर्यटन स्थलों पर टिकट के पैसा, यात्रा अवधी जैसे छोटी चीज़ें बदलती रहती है।
इसलिए यदि आपको इनके बारे में पता है तो जरूर कमेंट में जरूर बताएं हम जल्द ही आपके द्वारा दी गयी जानकारी को अपडेट कर देंगे।
यदि इस पोस्ट में कुछ गलती रह गयी हो तो उसे कमेंट में जरूर बताएं।
धन्यवाद।
Me abhi 27 /09/2021 ko meharangarh fort me ghoomne gya tha ab 120 se badha kar doso rupay fees kar di gyi he indian ke liye or student ke liye 100 rupay
इस जानकारी के लिए धन्यवाद ! अतुल जी, हमने इस आर्टिकल में आपके द्वारा बताये गए प्रवेश शुल्क के बारे में अपडेट कर दिया है।